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tum kyu nahi samjhe..

इन लबों की बेजुबानी तुम नहीं समझे, क्यूं था आंख मे पानी तुम नहीं समझे, यूं तो समझ लेते हो हर गैर जरुरी बात, कभी ज़ज्बात के मानी तुम नहीं समझे, हम तसव्वुर में भी रख दे जां हथेली पर, साथ रहकर भी कहानी तुम नहीं समझे, गिले शिकवे कब के छोड़ दिए हैं हमने, क्यों मुस्कुराने की ठानी तुम नहीं समझे, जर्रे-जर्रे में प्रेम फैल गया खुश्बू बन कर, कब पुष्प ने दी कुर्बानी तुम नहीं समझे।

Nilesh Singh Rajput

*वक्त ने तराशा बहुत कि हीरा बन जाऊँ..* *मैं कोयला ही बना रहा, बिक जाने के खौफ से..*

Nilesh Singh Rajput

*जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले* *लौट कर यादें आती है, वक़्त नहीं*