संदेश

Badal gaye hai wo log...

बदल गये हैं लोग आहिस्ता...आहिस्ता......अब तो हमारा भी हक बनता है.....

tum kyu nahi samjhe..

इन लबों की बेजुबानी तुम नहीं समझे, क्यूं था आंख मे पानी तुम नहीं समझे, यूं तो समझ लेते हो हर गैर जरुरी बात, कभी ज़ज्बात के मानी तुम नहीं समझे, हम तसव्वुर में भी रख दे जां हथेली पर, साथ रहकर भी कहानी तुम नहीं समझे, गिले शिकवे कब के छोड़ दिए हैं हमने, क्यों मुस्कुराने की ठानी तुम नहीं समझे, जर्रे-जर्रे में प्रेम फैल गया खुश्बू बन कर, कब पुष्प ने दी कुर्बानी तुम नहीं समझे।

Nilesh Singh Rajput

*वक्त ने तराशा बहुत कि हीरा बन जाऊँ..* *मैं कोयला ही बना रहा, बिक जाने के खौफ से..*

Nilesh Singh Rajput

*जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले* *लौट कर यादें आती है, वक़्त नहीं*

uski yaden

तेरे जाने से कुछ नही बदला बस पहले जहां दिल होता था अब वहां दर्द होता है....... दर्द ....✍​​
जख्म दिल को देते हैं टूट कर, जो सपने सुनहरे होते हैं, एतबार न करिये कभी उनपर जिनके मासूम चेहरे होते है।             स्वरचित सिद्धार्थ पाण्डेय
Bulbulo ke Pankho mein bandhe hue kabhi Baaz nahi rehte  Buzdilo aur Kayaro ke Haath Kabhi Raaz Nahi Rehte Ser Jhuka ke Chalne ki aadat pad jaaye jis Insaan Ko  Us Insaan ke Ser Per Kabhi Taaj Naahi Rehte